रायपुर/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और करीब 21 साल पुराने चावल घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत में लगभग 40 हजार पन्नों का चालान पेश किया है। इस मामले में आरोपी सुनील कुमार निगम और खरसिया निवासी विमल कुमार गर्ग के खिलाफ अभियोजन पत्र दाखिल किया गया है। लंबे समय से जांच के दायरे में रहे इस मामले में EOW की कार्रवाई ने पुराने सरकारी खाद्यान्न घोटाले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
मामला जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित राज्य भंडार गृह के गोदाम से जुड़ा है, जहां जांच के दौरान करीब 22 हजार क्विंटल चावल की कमी सामने आई थी। इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी चावल का हिसाब नहीं मिलना अपने आप में गंभीर मामला था। जांच में कथित तौर पर चावल के परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा किए जाने के साथ-साथ सरकारी चावल की अफरा-तफरी के तथ्य सामने आए।
2005 में दर्ज हुआ था अपराध
इस मामले में अपराध वर्ष 2005 में दर्ज किया गया था। इसके बाद से मामले की जांच विभिन्न स्तरों पर आगे बढ़ती रही। सरकारी खाद्यान्न के बड़े पैमाने पर गायब होने और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं ने जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े किए थे।
अब करीब दो दशक से अधिक समय बाद EOW ने जांच को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के खिलाफ 40 हजार पन्नों का विस्तृत चालान अदालत में पेश किया है। इतने बड़े दस्तावेजी चालान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जांच के दौरान बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को खंगाला गया है।
22 हजार क्विंटल चावल की कमी ने उठाए थे गंभीर सवाल
कुनकुरी के राज्य भंडार गृह में 22 हजार क्विंटल चावल की कमी का मामला सामने आने के बाद सरकारी खाद्यान्न के भंडारण, परिवहन और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। जांच का प्रमुख बिंदु यह रहा कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में चावल गोदाम से कैसे गायब हुआ और उसके परिवहन का रिकॉर्ड किस तरह तैयार किया गया।
EOW के मुताबिक, मामले में फर्जी तरीके से परिवहन रिकॉर्ड तैयार करने और चावल की अफरा-तफरी से जुड़े पहलुओं की जांच की गई है। जांच एजेंसी अब पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं को खंगाल रही है।
लंबे इंतजार के बाद कार्रवाई से बढ़ी हलचल
करीब 21 साल पुराने इस मामले में चालान पेश होने के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने की उम्मीद है। इतने लंबे समय से लंबित रहे इस चर्चित मामले में EOW की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
सरकारी चावल की इतनी बड़ी मात्रा में कमी और कथित फर्जी परिवहन रिकॉर्ड का यह मामला छत्तीसगढ़ में खाद्यान्न प्रबंधन और सरकारी संसाधनों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। EOW की जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की संभावना बनी हुई है।
21 साल पुराने इस मामले में 40 हजार पन्नों का चालान पेश होना बताता है कि यह महज चावल की कमी का मामला नहीं, बल्कि सरकारी खाद्यान्न के रिकॉर्ड, परिवहन और कथित अफरा-तफरी से जुड़ा एक बड़ा प्रकरण है, जिसका अंतिम सच अब न्यायिक प्रक्रिया में सामने आएगा।








