प्रतापपुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मदननगर में सोमवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। पंचायत की बर्खास्त सरपंच सुंदरी बाई के समर्थन में पंचायत के 20 निर्वाचित पंचों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। इस सामूहिक इस्तीफे ने पूरे क्षेत्र की राजनीति और पंचायत व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है। ग्रामीण इसे आदिवासी नेतृत्व के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासन पहले ही सरपंच को शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में पद से पृथक कर चुका है।
पंचों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी, प्रतापपुर को सौंपे इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया है कि सुंदरी बाई को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1)(ख) के तहत असंवैधानिक और विधि-विरुद्ध तरीके से बर्खास्त किया गया। उनका कहना है कि सरपंच क्षेत्र के आदिवासी किसानों की आवाज उठा रही थीं तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। विरोध स्वरूप सभी पंचों ने स्वेच्छा से अपने पद से त्यागपत्र देते हुए प्रशासन से तत्काल प्रभाव से इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की है।
गौरतलब है कि मदननगर, कनकनगर और जगन्नाथपुर क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल भटगांव ओपन कास्ट कोयला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एवं डीजीपीएस सर्वे का कार्य किया जा रहा था। प्रशासन के अनुसार 2 और 3 अप्रैल 2026 को सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें सुंदरी बाई पर ग्रामीणों का नेतृत्व करने और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया। प्रकरण की सुनवाई के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), प्रतापपुर ने 8 जुलाई 2026 को उपलब्ध अभिलेखों, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर धारा 40(1)(ख) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से पृथक करने का आदेश जारी किया था।
सुनवाई के दौरान सुंदरी बाई ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि ग्रामसभा को सर्वेक्षण की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी तथा उन्होंने किसी भी प्रकार से ग्रामीणों को उकसाया नहीं। उनका कहना था कि मदननगर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि प्रशासन ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की।
सोमवार को पंचायत के 20 पंचों द्वारा एक साथ इस्तीफा दिए जाने के बाद पूरे प्रतापपुर क्षेत्र में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर इसे पंचायत व्यवस्था में असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है। वहीं, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, मुआवजा और ग्रामसभा की भूमिका को लेकर पहले से चल रहे विवाद के बीच इस घटनाक्रम ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
सामूहिक इस्तीफा देने वालों में सुनीता बेक, अमृता केसरी, हिरामती बेक, रामविनोद खाखा, धनसाय खेस, नन्की आयम, छोटेलाल कुजूर, अजय मिंज, कालीचरण, राधिका करसायल, फूलकुमारी साण्डिल्य, मानती खलखों, धरमजीत मिंज, दीपा टोप्पों, बीगन गिद्ध, करीमन, गीता गिद्ध, अमिला मिंज, करमु खलखों और बिसनी किस्पोट्टा शामिल हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि सामूहिक इस्तीफों पर क्या निर्णय लिया जाता है और पंचायत में उत्पन्न इस असाधारण स्थिति का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।








