20 दिन भी नहीं टिक सका 16 लाख का रपटा, पहली बारिश में बहा; 18 गांवों का संपर्क टूट
एक साल पहले 1.30 करोड़ का स्थायी पुल भी हुआ था ध्वस्त, अब अस्थायी रपटा भी पहली बारिश में बहा; 26 हजार आबादी प्रभावित
भैयाथान। सूरजपुर जिले के भैयाथान को कोरिया जिले से जोड़ने वाले गोबरी नदी पर बने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक वर्ष पहले करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से बना स्थायी पुल क्षतिग्रस्त होकर टूट गया था। उसके बाद आवागमन बहाल करने के लिए करीब 16 लाख रुपये की लागत से अस्थायी रपटा का निर्माण कराया गया, लेकिन यह भी पहली ही बारिश में बह गया।
जानकारी के अनुसार, रपटा निर्माण के लिए लगभग एक वर्ष पहले राशि स्वीकृत हुई थी। सेतु विभाग के ठेकेदार द्वारा करीब 20 दिन पहले निर्माण कार्य पूरा कर आवागमन शुरू कराया गया था। लेकिन बीती रात हुई पहली बारिश में गोबरी नदी के तेज बहाव के सामने नया रपटा टिक नहीं सका और बह गया। घटना के बाद निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रपटा बहने से बांसापारा, गंगौटी सहित 18 गांवों की करीब 26 हजार आबादी का संपर्क प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों और मरीजों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। बरसात के पूरे मौसम में लोगों के लिए जिला मुख्यालय और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप होता तो पहली ही बारिश में रपटा नहीं बहता। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर ठेकेदार, संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
लगातार दूसरी बार करोड़ों और लाखों रुपये के सरकारी निर्माण कार्यों के ध्वस्त होने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और सेतु विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और दोषियों पर जवाबदेही तय होती है या नहीं।








