सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक में लात नाला हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। चार दिनों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद बुधवार को बाढ़ के पानी में बह गई कार को बाहर निकाला गया। कार के भीतर पूर्व सरपंच देवनारायण पटेल और उनकी पत्नी सविता पटेल के शव मिले। सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य यह था कि दोनों आखिरी क्षण तक एक-दूसरे का हाथ थामे हुए थे।
रविवार शाम देवनारायण पटेल अपनी पत्नी के साथ कार से सारंगढ़ मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान माधोपाली के पास उफनते लात नाला को पार करते समय कार अनियंत्रित होकर तेज बहाव में बह गई। बताया जाता है कि कार करीब डेढ़ किलोमीटर तक पानी के साथ बह गई थी।
हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमें लगातार तीन दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाती रहीं। छत्तीसगढ़ के चार जिलों से पहुंची विशेषज्ञ टीमों ने अथक प्रयास किए, लेकिन कार का पता नहीं चल सका।
इसके बाद मंगलवार देर रात पंजाब से एक निजी गोताखोर टीम मौके पर पहुंची। बुधवार सुबह करीब नौ बजे टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया और कुछ ही समय में कार की सटीक लोकेशन का पता लगा लिया। प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से रस्सियों के सहारे कार को पानी से बाहर निकाला गया।
जब कार का दरवाजा खोला गया तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पति-पत्नी कार की पिछली सीट पर एक-दूसरे का हाथ थामे मिले। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि रेस्क्यू में शामिल अनुभवी गोताखोर भी भावुक हो उठे। टीम के सदस्यों ने बताया कि करीब 37 वर्षों के रेस्क्यू अनुभव में उन्होंने पहली बार ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखा।
दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इस बीच स्थानीय लोगों ने कार और शवों को खोज निकालने वाली पंजाब की निजी गोताखोर टीम का आभार व्यक्त किया।
यह हादसा न केवल बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानी की अहमियत को याद दिलाता है, बल्कि जीवन के अंतिम क्षणों तक साथ निभाने वाले इस दंपती के अटूट रिश्ते की मार्मिक कहानी भी बयां करता है।







