महासमुंद ।
महासमुंद पुलिस की तकनीकी जांच में बड़ा खुलासा, ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक फैला था अवैध कारोबार; मुख्य आरोपी के ठिकाने से 81 लाख रुपये नकद बरामद
महासमुंद/रायपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की बड़े पैमाने पर हो रही अंतरराज्यीय तस्करी के एक कथित सिंडिकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की तकनीकी विवेचना में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के नेटवर्क ने पिछले करीब दो वर्षों में ओडिशा से लेकर हिमाचल प्रदेश तक 120 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी की अवैध तस्करी की।
पुलिस जांच के मुताबिक, तस्करी से अर्जित रकम और अवैध कारोबार को वैध कारोबारी गतिविधि का रूप देने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी इनवॉयसिंग का नेटवर्क तैयार किया गया था। इसके लिए कथित तौर पर 8 शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता था। इन कंपनियों के माध्यम से फर्जी बिल और इनवॉयस तैयार कर अवैध खैर लकड़ी के कारोबार को कागजों पर वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।
ओडिशा से हिमाचल तक फैला था नेटवर्क
महासमुंद पुलिस की जांच में इस नेटवर्क के अंतरराज्यीय स्वरूप का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, सिंडिकेट का संचालन कई स्तरों पर किया जा रहा था और खैर लकड़ी की अवैध सप्लाई ओडिशा से शुरू होकर देश के अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाई जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि अवैध कारोबार से जुड़े करोड़ों रुपये के लेनदेन, भुगतान और रकम की लेयरिंग के लिए 10 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल किया गया। इन खातों के जरिए रकम को अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर कर उसके वास्तविक स्रोत और लाभार्थियों को छिपाने का प्रयास किए जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है।
मुख्य आरोपी के ठिकाने से 81 लाख रुपये नकद
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 7 सितंबर को मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल के ठिकाने से 81 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसके बाद पुलिस ने फर्जी इनवॉयसिंग और कथित वित्तीय नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश तेज कर दी।
तकनीकी साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की जांच के आधार पर पुलिस अब इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो कारोबारी गिरफ्तार
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर महासमुंद पुलिस ने ओडिशा के दो फर्म संचालकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पर सिंडिकेट को फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने में कथित भूमिका निभाने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:
पारितोष मिश्रा — संचालक, पीयूष इंटरप्राइजेज, बोलांगीर, ओडिशा
अखिलेश सिंघल — संचालक, सिंघल इंटरप्राइजेज, संबलपुर, ओडिशा
पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी इनवॉयस तैयार करने का पूरा तंत्र कैसे संचालित होता था और इस नेटवर्क से अन्य कौन-कौन से कारोबारी, फर्म या व्यक्ति जुड़े हुए हैं।
देशभर में फैले नेटवर्क की परतें खुलने की उम्मीद
120 करोड़ रुपये से अधिक की कथित खैर लकड़ी तस्करी, 8 शेल कंपनियों के जरिए फर्जी इनवॉयसिंग और 10 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल के खुलासे के बाद यह मामला अब केवल लकड़ी तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस की वित्तीय और तकनीकी जांच से इस पूरे नेटवर्क में फर्जी दस्तावेज, अवैध धन के लेनदेन और रकम की लेयरिंग की संभावित भूमिका की भी पड़ताल हो रही है।
महासमुंद पुलिस की इस कार्रवाई से खैर लकड़ी की अवैध तस्करी के पीछे सक्रिय अंतरराज्यीय नेटवर्क के सामने आने की संभावना बढ़ गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस सिंडिकेट से जुड़े और लोगों, कंपनियों तथा वित्तीय लेनदेन का खुलासा होने की उम्मीद है।








