नरेश शर्मा
सुकमा, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की लगातार जारी कार्रवाई के बीच सुकमा जिले में एक बार फिर बड़ी सफलता हाथ लगी है। बेलपोच्चा-गोमपाड़ के घने जंगलों में सर्चिंग के दौरान सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए एक डम्प का पता लगाया है। डम्प से बड़ी मात्रा में विस्फोटक और अन्य घातक सामग्री बरामद की गई है।
बरामद सामग्री में 2 टिफिन बम, करीब 8 किलो IED, 10 डेटोनेटर, 17 जिलेटिन स्टिक और कोडेक्स वायर शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस सामग्री का इस्तेमाल सुरक्षा बलों को निशाना बनाने या किसी बड़ी हिंसक वारदात को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था। समय रहते डम्प का पता लगने से नक्सलियों की संभावित साजिश को बड़ा झटका लगा है।
यह कार्रवाई जिला बल, DRG और बस्तर फाइटर्स की संयुक्त टीम ने की। अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिले इनपुट के आधार पर संबंधित इलाके में सर्चिंग अभियान चलाया गया था। जंगल में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों को संदिग्ध गतिविधियों और छिपाकर रखी गई सामग्री के बारे में सुराग मिला, जिसके बाद डम्प की पहचान कर विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।
बस्तर में कमजोर पड़ता नक्सली नेटवर्क
बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। नक्सली संगठनों के खिलाफ अभियानों, आत्मसमर्पण और खुफिया तंत्र को मजबूत किए जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां नक्सलियों के ठिकानों और उनके छिपे हुए हथियार व विस्फोटक डम्प तक पहुंचने में लगातार सफल हो रही हैं।
सुरक्षा बलों को आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिलने वाली सूचनाएं भी अभियान में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। इन इनपुट के आधार पर जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाकर हथियार, विस्फोटक, IED बनाने की सामग्री और अन्य घातक सामान बरामद किया जा रहा है। इससे नक्सली नेटवर्क की लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल क्षमता पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
केंद्र की रणनीति का असर, सुरक्षा और विकास पर जोर
छत्तीसगढ़ समेत देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र सरकार की ओर से नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियान के साथ विकास और आत्मसमर्पण नीति पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्र और राज्य की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर किए जा रहे लक्षित अभियानों को नक्सल प्रभावित इलाकों में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बस्तर में सड़क, संचार, सुरक्षा ढांचे और ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के साथ सुरक्षा अभियानों को तेज किए जाने से नक्सली प्रभाव वाले इलाकों में सरकार की पहुंच मजबूत हुई है। इसी के समानांतर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से मिलने वाले इनपुट सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया स्रोत बन रहे हैं।
सुकमा में हुई यह बरामदगी इसी व्यापक अभियान की एक और कड़ी मानी जा रही है। बड़ी मात्रा में विस्फोटक का बरामद होना न केवल सुरक्षा बलों की सतर्कता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि जंगलों में छिपे नक्सली नेटवर्क के खिलाफ खुफिया जानकारी और जमीनी ऑपरेशन किस तरह लगातार काम कर रहे हैं।
फिलहाल सुरक्षा बलों ने बरामद विस्फोटक सामग्री को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही आसपास के जंगलों में सर्चिंग अभियान जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद सामग्री को कहां और किस वारदात के लिए इस्तेमाल किया जाना था तथा इसके पीछे सक्रिय नक्सली नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक कैसे पहुंचा जाए।
सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और नक्सलियों के ठिकानों से हो रही हथियार-विस्फोटकों की बरामदगी को बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की अहम उपलब्धि माना जा रहा है।








